स्तोत्र · सहस्रनाम

सहस्रनाम स्तोत्र

पूर्वभाग, विनियोग, न्यास, ध्यान, मूल स्तोत्र और फलश्रुति — सही क्रम में; बड़े और साफ़ अक्षरों में।

पाठ से पहले — «ॐ» के विषय में

परम्परा के अनुसार «ॐ» (प्रणव) का उच्चारण यज्ञोपवीत संस्कार के बाद किया जाता है। जिनका यज्ञोपवीत संस्कार नहीं हुआ है, वे पाठ में आए «ॐ» को छोड़कर, या उसके स्थान पर «नमः» कहकर पाठ आगे करते रहें — भाव और श्रद्धा से किया गया पाठ पूर्ण है।

आपका चुनाव इस फ़ोन में याद रहता है; पूरे पाठ में «ॐ» उसी के अनुसार दिखेगा।

यज्ञोपवीत संस्कार — न्यूनतम, श्रेष्ठ और अधिकतम आयु
वर्णन्यूनतम आयुश्रेष्ठ आयुअधिकतम आयु
ब्राह्मण5वाँ वर्ष8वाँ वर्ष16 वर्ष
क्षत्रिय6ठा वर्ष11वाँ वर्ष22 वर्ष
वैश्य8वाँ वर्ष12वाँ वर्ष24 वर्ष

(आयु की गणना गर्भ से की जाती है।)

न्यूनतम आयु — मनुस्मृति 2.37

ब्रह्मवर्चसकामस्य कार्यं विप्रस्य पञ्चमे।
राज्ञो बलार्थिनः षष्ठे वैश्यस्येहार्थिनोऽष्टमे॥

अर्थ: ब्रह्मतेज की इच्छा हो तो ब्राह्मण का 5वें वर्ष में, बल की इच्छा हो तो क्षत्रिय का 6ठे वर्ष में और धन-समृद्धि की इच्छा हो तो वैश्य का 8वें वर्ष में उपनयन करें।

श्रेष्ठ आयु — मनुस्मृति 2.36

गर्भाष्टमेऽब्दे कुर्वीत ब्राह्मणस्योपनायनम्।
गर्भादेकादशे राज्ञो गर्भात्तु द्वादशे विशः॥

अर्थ: ब्राह्मण का उपनयन गर्भ से 8वें वर्ष में, क्षत्रिय का 11वें वर्ष में और वैश्य का 12वें वर्ष में करना चाहिए।

अधिकतम आयु — मनुस्मृति 2.38

आषोडशाद्ब्राह्मणस्य सावित्री नातिवर्तते।
आद्वाविंशात्क्षत्रबन्धोराचतुर्विंशतेर्विशः॥

अर्थ: ब्राह्मण के लिए 16 वर्ष, क्षत्रिय के लिए 22 वर्ष और वैश्य के लिए 24 वर्ष तक सावित्री का काल नहीं बीतता।

मनुस्मृति 2.39

अत ऊर्ध्वं त्रयोऽप्येते यथाकालमसंस्कृताः।
सावित्रीपतिता व्रात्या भवन्त्यार्यविगर्हिताः॥

अर्थ: अधिकतम आयु के बाद भी जिनका संस्कार नहीं हुआ, वे सावित्री-पतित (व्रात्य) हो जाते हैं। उनके लिए प्रायश्चित्त (व्रात्य-स्तोम) करके ही उपनयन का विधान है।

(पारस्कर गृह्यसूत्र 2.5 और याज्ञवल्क्य स्मृति 1.37 में भी यही आयु-सीमाएँ बताई गई हैं।)

🙏 अपने बालक का यज्ञोपवीत संस्कार समय रहते कराएँ।

सहस्रनाम सूची

उपलब्धभगवान विष्णुश्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्108 श्लोक · विनियोग, न्यास, ध्यान और फलश्रुति सहितउपलब्धमाँ ललिता त्रिपुरसुन्दरीश्रीललितासहस्रनामस्तोत्रम्183 श्लोक · विनियोग और ध्यान सहितउपलब्धभगवान शिवश्रीशिवसहस्रनामस्तोत्रम्130 श्लोक · फलश्रुति सहितउपलब्धश्री गणेशश्रीगणेशसहस्रनामस्तोत्रम्169 श्लोक · विनियोग, न्यास, ध्यान और फलश्रुति सहितउपलब्धश्रीकृष्ण (गोपाल)श्रीगोपालसहस्रनामस्तोत्रम्142 श्लोक · विनियोग, न्यास, ध्यान और फलश्रुति सहितउपलब्धभगवान श्रीरामश्रीरामसहस्रनामस्तोत्रम्120 श्लोक · ध्यान सहितउपलब्धमाँ गायत्रीश्रीगायत्रीसहस्रनामस्तोत्रम्146 श्लोक · ध्यान और फलश्रुति सहितउपलब्धभगवान कार्तिकेय (स्कन्द, षण्मुख)श्रीसुब्रह्मण्यसहस्रनामस्तोत्रम्131 श्लोक · विनियोग, ध्यान और फलश्रुति सहित
शीघ्रहनुमान जीश्रीहनुमत्सहस्रनामशीघ्र जुड़ेगा
शीघ्रमाँ लक्ष्मीश्रीलक्ष्मीसहस्रनामशीघ्र जुड़ेगा
शीघ्रमाँ दुर्गाश्रीदुर्गासहस्रनामशीघ्र जुड़ेगा
शीघ्रभगवान सूर्यश्रीसूर्यसहस्रनामशीघ्र जुड़ेगा

अष्टोत्तरशतनाम (108 नाम) स्तोत्र →

«शीघ्र» वाले स्तोत्र आगे जोड़े जाएँगे।
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