दैनिक पंचांग · सूर्यसिद्धान्तीय गणना
आज का पंचांग
तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त और राहु काल — आपके शहर के अनुसार, हर दिन अपने-आप।
पंचांग के पाँच अंग
सूर्य, चन्द्र और काल
आगे के 7 दिन
तिथि, नक्षत्र, योग, करण, संक्रान्ति और मास की गणना सूर्यसिद्धान्त की परम्परागत पद्धति से होती है; सूर्योदय और सूर्यास्त चुने हुए शहर के दृश्य सूर्योदय के अनुसार हैं। सब समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं। व्रत, पर्व या संस्कार का निर्णय अपने कुल-पुरोहित या आचार्य से पूछकर ही कीजिए।
समझिए
पंचांग के पाँच अंग क्या हैं
पंचांग का अर्थ है पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। भारतीय परम्परा में दिन का आरम्भ सूर्योदय से माना जाता है, इसलिए सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वही उस दिन की तिथि कहलाती है।
तिथि। चन्द्रमा और सूर्य के बीच की दूरी के हर 12 अंश से एक तिथि बनती है। एक चान्द्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में, 15 कृष्ण पक्ष में।
वार। सप्ताह के सात दिन — रविवार से शनिवार तक। पंचांग में वार भी सूर्योदय से सूर्योदय तक गिना जाता है।
नक्षत्र। चन्द्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वह उस समय का नक्षत्र है। राशिचक्र के 27 बराबर भाग हैं, हर एक 13 अंश 20 कला का।
योग। सूर्य और चन्द्रमा के निरयण भोगांश को जोड़कर बनता है। योग 27 हैं — विष्कम्भ से वैधृति तक।
करण। आधी तिथि को करण कहते हैं। कुल 11 करण हैं — 7 चर और 4 स्थिर। विष्टि करण को ही भद्रा कहा जाता है।
राहु काल। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिनमान के आठ भागों में से एक, जो हर वार के लिए अलग होता है। परम्परा में नए कार्य का आरम्भ इस समय में प्रायः टाला जाता है।
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