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हरिहर स्वामी करपात्री धर्मार्थ ट्रस्ट Harihar Swami Karpatri Dharmarth Trust
हिंEN

हरिहर स्वामी
करपात्री धर्मार्थ ट्रस्ट

धर्म परम्परा साधना सेवा

सनातन धर्म की परम्पराओं, शास्त्रीय पूजा-पद्धतियों और सेवा के भाव को आधुनिक समय तक पहुँचाने का एक प्रयास।

  • शास्त्रीय परम्परा
  • पूजा एवं अनुष्ठान
  • धार्मिक अध्ययन
  • सेवा

हरिहर स्वामी
करपात्री धर्मार्थ ट्रस्ट

Harihar Swami
Karpatri Dharmarth Trust

02 · संस्था

एक संस्था। एक संकल्प।
एक परम्परा।

हरिहर स्वामी करपात्री धर्मार्थ ट्रस्ट का उद्देश्य सनातन धर्म की धार्मिक परम्पराओं, पूजा-पद्धतियों, शास्त्रीय अध्ययन और सेवा-भाव को सम्मानपूर्वक आगे बढ़ाना है।

धर्म का बहुत बड़ा भाग आज केवल सुनी-सुनाई बातों पर चल रहा है। कौन-सा कर्म किस विधि से किया जाता है, उसके पीछे शास्त्र क्या कहता है, और कहाँ शास्त्र मौन है — यह भेद धीरे-धीरे मिटता जा रहा है। ट्रस्ट का प्रयत्न इसी भेद को फिर से स्पष्ट करने का है।

इसी दृष्टि से “पितृ-कर्म श्राद्ध-मीमांसा” पुस्तक प्रस्तुत की गई — पितृ कर्म, श्राद्ध की विधि और उनसे जुड़े प्रश्नों के शास्त्रीय उत्तरों पर केंद्रित एक कृति। कहीं भय नहीं, कहीं चमत्कार का दावा नहीं; जो शास्त्र में है, वही सन्दर्भ सहित।

जहाँ अनुष्ठान किया जाता है, वहाँ विधि, संकल्प और उद्देश्य — तीनों यजमान को पहले ही स्पष्ट बता दिए जाते हैं। यह हमारी कार्य-पद्धति का मूल है, कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं।

03 · दृष्टि

धर्म को केवल उत्सव नहीं,
जीवन-पद्धति के रूप में समझना

01

परम्परा

सनातन धार्मिक परम्पराओं को समझना और सम्मानपूर्वक आगे बढ़ाना।

02

शास्त्र

पूजा, व्रत, अनुष्ठान और आचार के पीछे के शास्त्रीय आधार को समझना।

03

सेवा

धर्म के साथ समाज और आवश्यकता के अनुसार सेवा-भाव को जोड़ना।

05 · भाव

पूजा केवल एक सेवा नहीं है।

  • यह संकल्प है।
  • यह विधि है।
  • यह श्रद्धा है।
  • यह परम्परा है।

इसीलिए प्रत्येक अनुष्ठान के पीछे उसकी विधि, संकल्प, मंत्रोच्चार और धार्मिक उद्देश्य को समझना आवश्यक है।

संकल्प पहले यह तय होता है
कि पूजा किसके लिए है।
यजमान का नाम, गोत्र और उद्देश्य — यही संकल्प है। इसके बिना अनुष्ठान आरम्भ नहीं होता।

06 · प्रक्रिया

अनुष्ठान कैसे होता है

  1. 01

    संकल्प

    यजमान की आवश्यक जानकारी एवं संकल्प — नाम, गोत्र और जिस उद्देश्य से अनुष्ठान किया जा रहा है।

  2. 02

    तैयारी

    पूजा-विधि एवं आवश्यक सामग्री की तैयारी। तिथि यजमान से बात करके निश्चित की जाती है।

  3. 03

    अनुष्ठान

    निर्धारित विधि एवं मंत्रोच्चार के अनुसार पूजा सम्पन्न की जाती है।

  4. 04

    सहभागिता

    जहाँ सुविधा उपलब्ध हो वहाँ यजमान live जुड़ सकते हैं। अनुष्ठान के चित्र और वीडियो भेजे जाते हैं।

07 · अध्ययन

सनातन धर्म को समझिए

प्रश्न पूछना अश्रद्धा नहीं है। परम्परा उन्हीं के लिए जीवित रहती है जो उसे समझना चाहते हैं।

  • पूजा कैसे करनी चाहिए?
  • पूजा में कौन-सी सामान्य गलतियाँ होती हैं?
  • संकल्प का क्या महत्व है?
  • व्रत क्यों किया जाता है?
  • मंत्रोच्चार की परम्परा क्या है?
  • शास्त्र और लोक-परम्परा में क्या अंतर है?
डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा

08 · मार्गदर्शन

डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा

सनातन धर्म · शास्त्र · आध्यात्मिक मार्गदर्शन

सात पीढ़ियाँ — शास्त्र, ग्रन्थ-लेखन और ज्योतिष

डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा सनातन शास्त्रों के अध्येता हैं। वे “पितृ-कर्म श्राद्ध-मीमांसा” पुस्तक के लेखक हैं — पितृ दोष और श्राद्ध से जुड़े प्रश्नों के शास्त्रीय उत्तरों पर केंद्रित यह कृति हरिहर स्वामी करपात्री धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा प्रस्तुत की गई है।

विभिन्न आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता रही है। उनकी दृष्टि सरल है — जो शास्त्र में है, वही स्पष्ट शब्दों में कहा जाए; और जहाँ शास्त्र मौन है, वहाँ मौन रहा जाए।

09 · पारदर्शिता

विश्वास केवल शब्दों से नहीं बनता।

इसलिए संस्था से संबंधित जानकारी, पूजा की प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था को यथासंभव स्पष्ट रखा जाता है।

संस्था की जानकारी

हरिहर स्वामी करपात्री धर्मार्थ ट्रस्ट (Harihar Swami Karpatri Dharmarth Trust) — यही आधिकारिक नाम है।

पूजा की जानकारी

कौन-सा अनुष्ठान किया जाएगा, किस विधि से और किस तिथि को — यह सब संकल्प से पहले स्पष्ट बता दिया जाता है।

सहभागिता

दक्षिणा की राशि और उसमें क्या-क्या सम्मिलित है, यह बात करके पहले ही तय कर लिया जाता है। कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं।

अनुष्ठान के बाद

पूजा के चित्र और वीडियो यजमान को भेजे जाते हैं। जो व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, उसका आश्वासन नहीं दिया जाता।

10 · सहभागिता

धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता

अनुष्ठान की प्रकृति के अनुसार दक्षिणा निर्धारित होती है। इसीलिए सहभागिता से पहले बात कर लेना आवश्यक है — ताकि विधि, तिथि और उसमें सम्मिलित बातें आपको पहले ही स्पष्ट हो जाएँ।

अनुष्ठान

पार्थिव शिवलिंग पूजन

  • यजमान के नाम एवं गोत्र से संकल्प
  • शास्त्रीय विधि से पार्थिव शिवलिंग पूजन
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा
  • जहाँ सुविधा हो वहाँ live सहभागिता
  • अनुष्ठान के चित्र एवं वीडियो
संकल्प हेतु आगे बढ़ें

विशेष अवसर

विशेष सहभागिता

  • विशेष संकल्प के अनुसार विस्तृत अनुष्ठान
  • यजमान के नाम एवं गोत्र से संकल्प
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा
  • जहाँ सुविधा हो वहाँ live सहभागिता
  • अनुष्ठान के चित्र एवं वीडियो
संकल्प हेतु आगे बढ़ें

प्रत्येक अनुष्ठान की दक्षिणा उसकी विधि और अवधि के अनुसार अलग-अलग होती है — इसीलिए वह यहाँ न लिखकर बात करके बताई जाती है।

11 · संकल्प

धर्म के साथ सेवा

ट्रस्ट का संकल्प है कि धार्मिक कार्य के साथ-साथ इन दिशाओं में सेवा को क्रमशः आगे बढ़ाया जाए। जैसे-जैसे कार्य आरम्भ होंगे, उनकी जानकारी यहीं स्पष्ट रूप से दी जाएगी।

  • संकल्पअन्न सेवा
  • संकल्पब्राह्मण सेवा
  • संकल्पधार्मिक आयोजन
  • संकल्पगौ सेवा
  • संकल्पशिक्षा
  • संकल्पधार्मिक साहित्य

ये संस्था की दिशाएँ हैं — इन्हें चल रहे कार्यक्रमों के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा। जो कार्य आरम्भ नहीं हुआ, उसका दावा करना परम्परा के विरुद्ध है।

12 · आगे की राह

आज से आगे की परम्परा

परम्परा का अर्थ केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि उसके मूल भाव को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना भी है।

जो विधि सौ वर्ष पहले जिस अर्थ के साथ की जाती थी, वह अर्थ आज भी वही है — केवल उसे कहने की भाषा बदल गई है। ट्रस्ट का प्रयत्न यही है कि वह अर्थ न खोए: अनुष्ठान हो तो विधि सहित, प्रश्न हो तो शास्त्र सहित, और सेवा हो तो बिना किसी प्रदर्शन के।

यह कार्य किसी एक पीढ़ी में पूरा होने वाला नहीं है। इसीलिए इसे धीरे और ठीक ढंग से करना ही उचित है।

13 · जिज्ञासा

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

पूजा में संकल्प कैसे लिया जाता है?

संकल्प अनुष्ठान का आरम्भ है। इसमें यजमान का नाम, गोत्र और जिस उद्देश्य से पूजा की जा रही है — यह स्पष्ट रूप से कहा जाता है। यही जानकारी पहले ली जाती है, और उसी के अनुसार पूजा आरम्भ होती है।

पूजा के लिए कौन-सी जानकारी आवश्यक है?

यजमान का नाम, गोत्र, और संकल्प का उद्देश्य। यदि गोत्र ज्ञात न हो तो परम्परा के अनुसार उसका विकल्प रहता है — इसलिए यह बाधा नहीं बनती।

क्या यजमान live जुड़ सकता है?

हाँ। जहाँ सुविधा उपलब्ध हो, वहाँ यजमान अनुष्ठान के समय live जुड़ सकते हैं। समय पहले से तय कर लिया जाता है, और इसी पन्ने से जुड़ा जाता है — पता कभी बदलता नहीं, इसलिए एक बार सुरक्षित कर लीजिए।

क्या पूजा के बाद कुछ मिलता है?

अनुष्ठान के चित्र और वीडियो यजमान को भेजे जाते हैं। प्रसाद डाक से भेजने की व्यवस्था अभी नहीं है — इसलिए वैसा कोई आश्वासन नहीं दिया जाता।

भुगतान किस माध्यम से होगा?

अभी सहभागिता के लिए सीधे सम्पर्क किया जाता है — फ़ोन अथवा WhatsApp पर। दक्षिणा की राशि, अनुष्ठान की तिथि और उसमें क्या-क्या सम्मिलित है, यह सब बात करके पहले ही स्पष्ट कर लिया जाता है।

पूजा की तिथि कैसे निर्धारित होती है?

तिथि अनुष्ठान की प्रकृति और परम्परागत विधि के अनुसार तय होती है। कोई भी तिथि यजमान से बात किए बिना नहीं मानी जाती।

क्या विशेष संकल्प किया जा सकता है?

हाँ। किसी विशेष धार्मिक अवसर अथवा व्यक्तिगत संकल्प के लिए पहले बात कर ली जाती है, और तभी यह तय होता है कि शास्त्रीय विधि में वह किस रूप में सम्भव है।

क्या पूजा के परिणाम की कोई गारंटी है?

धार्मिक अनुष्ठान शास्त्रीय विधि और श्रद्धा के अनुसार किए जाते हैं। किसी निश्चित सांसारिक परिणाम की गारंटी का दावा नहीं किया जाता।

श्रद्धा से संकल्प।
शास्त्रीय विधि से अनुष्ठान।
सेवा के भाव से सहभागिता।

संकल्प, तिथि और दक्षिणा — तीनों बात करके पहले ही स्पष्ट कर लिए जाते हैं।

पूजा एवं अनुष्ठान