पितृपक्ष में क्या करें, क्या न करें — वर्जित भोजन, खरीदारी, भागवत और पंचबलि

AI Summary · लेख सार

पितृपक्ष के पन्द्रह दिन पितरों के हैं, इसलिए इनमें देव-कार्य — भागवत-कथा, यज्ञ, नए अनुष्ठान — नहीं किए जाते, और नई वस्तु खरीदने का मुहूर्त भी नहीं निकलता। श्राद्ध के भोजन में गौ का दूध-घी उत्तम है; लाल टमाटर, काला चना, प्याज-लहसुन वर्जित हैं। पंचबलि में कौवे, कुत्ते, चींटी, गौ सबका भाग है — पर देव और पितृ-कार्य का भोजन कुत्ते की दृष्टि से बचाकर रखा जाता है। पार्वण श्राद्ध के बाद तीन दिन अनध्याय माना जाता है।

पितृपक्ष में क्या करें और क्या न करें? श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान की पूरी विधि — वीडियो वीडियो · 40:44 सेपितृपक्ष में क्या करें और क्या न करें? श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान की पूरी विधिYouTube पर देखिए →

Key Takeaways · मुख्य बिंदु

  • पितृपक्ष में देव-कार्य — भागवत, यज्ञ, नए जप — वर्जित हैं
  • पितृपक्ष में कोई पंचांग मुहूर्त नहीं देता, इसलिए नई खरीदारी नहीं
  • श्राद्ध में लाल टमाटर, काला चना, प्याज-लहसुन वर्जित
  • पंचबलि में सबका भाग है — पर देव-पितृ का भोजन कुत्ते की दृष्टि से बचाएँ
  • पार्वण श्राद्ध के बाद तीन दिन अनध्याय

श्राद्ध के भोजन में क्या बनाएँ

डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा बताते हैं —

उत्तम: गौ का घी, गौ का दूध, खीर, लौकी, कद्दू (काशीफल), परवल, मटर, उड़द।

वर्जित:

  • प्याज, लहसुन — और मांस, मछली, मदिरा का तो प्रश्न ही नहीं
  • लाल टमाटर
  • काला चना (मटर वर्जित नहीं है)
  • मूली — कहीं वर्जित, कहीं विहित; अपने कुल की रीति देखिए

काला चना और हलवा नवरात्रि में कन्या-भोज के लिए है। पितृपक्ष में कन्याओं के भोजन का विधान नहीं है।

मछली वाली परम्परा

कुछ क्षेत्रों में परम्परा है कि श्राद्ध में मछली न हो तो श्राद्ध पूरा नहीं माना जाता। डॉ. शर्मा कहते हैं — कलियुग में यह निषेध है। अन्य युगों में क्या था, उससे कलियुग का विधान तय नहीं होता। "मांस खाने में कोई दोष नहीं" जैसे वाक्य जो उद्धृत किए जाते हैं, उन्हें वे मनमाने श्लोक बताते हैं, जिनका शास्त्र से लेना-देना नहीं।

नई वस्तु क्यों नहीं खरीदते

सोना, गाड़ी, घर — किसी भी वस्तु की ख़रीद का मुहूर्त होता है। पितृपक्ष में कोई पंचांगकार मुहूर्त नहीं देता। जब मुहूर्त ही नहीं है, तो ख़रीद का प्रश्न नहीं उठता।

भागवत-कथा और देव-कार्य क्यों नहीं

ये पन्द्रह दिन पितरों के हैं — कृष्ण पक्ष पितरों का पक्ष है। भागवत-कथा, यज्ञ, हवन, नए मन्त्र-जप — ये सब देव-कार्य हैं, जो इस समय वर्जित हैं।

डॉ. शर्मा भागवताचार्यों से भी कहते हैं कि इन पन्द्रह दिनों का त्याग करें। स्वयं उन्हें भी तो अपना पार्वण श्राद्ध करना है, और उसके बाद तीन दिन वे कथा के अधिकारी नहीं रहते।

पंचबलि — कौवे को क्यों

सनातन धर्म में सबका आदर है और सबका भाग है। पक्षियों में कौवे को सबसे धूर्त माना गया, फिर भी शास्त्र ने उसे भी भाग दिया। पंचबलि में कौवा, कुत्ता, चींटी, गौ — सबके लिए भोजन निकलता है। यह नित्य कर्म है, बलि-वैश्वदेव के रूप में।

पर एक सावधानी: कुत्ते को भोजन देना पुण्य है, किन्तु देव या पितृ-कार्य के भोजन पर यदि कुत्ते की दृष्टि पड़ गई, या उसने छू लिया, तो वह भोजन न भगवान के भोग के योग्य रहता है, न पितरों के। सड़क पर घूमते पशुओं को ख़ूब खिलाइए — बस पूजा-श्राद्ध के भोजन को उनसे अलग रखिए।

भोजन करते समय

  • जूते पहनकर
  • खड़े होकर
  • एक ही थाली में कई लोग

— इस तरह किए गए भोजन में देवताओं और पितरों का भाग नहीं रहता।

श्राद्ध के बाद तीन दिन

पार्वण श्राद्ध के बाद तीन दिन श्राद्ध का भोजन नहीं करना चाहिए, और अनध्याय रखा जाता है। डॉ. शर्मा बनारस का अनुभव बताते हैं — वहाँ बड़े आचार्य अपने पिता के श्राद्ध के बाद तीन दिन पढ़ाते नहीं थे।

ग्रहण, होली और पार्वण श्राद्ध — इन तीनों के बाद तीन दिन का यह नियम माना जाता है।

इस विषय पर विस्तार से पढ़ना हो तो डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा की पुस्तक पितृ-कर्म श्राद्ध-मीमांसा देखिए, और पितृपक्ष की पूरी मार्गदर्शिका यहाँ है।

*स्रोत — यह लेख डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा की वीडियो-चर्चा पर आधारित है (ऊपर वीडियो की कड़ी)। श्राद्ध की तिथि और मुहूर्त हर वर्ष बदलते हैं — अपने पंचांग और कुल-पुरोहित से मिलाकर ही तय कीजिए।*

यह पूरी बात डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा से सुनिएवीडियो में 40:44 से · YouTube पर

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

पितृपक्ष में कौन-सा भोजन नहीं बनाना चाहिए? +

प्याज, लहसुन, लाल टमाटर और काला चना वर्जित हैं; मांस, मछली और मदिरा का तो प्रश्न ही नहीं। मूली कहीं वर्जित है, कहीं विहित — अपने कुल की रीति देखिए।

पितृपक्ष में नई वस्तु क्यों नहीं खरीदते? +

क्योंकि किसी भी वस्तु की ख़रीद का मुहूर्त होता है, और पितृपक्ष में कोई पंचांगकार मुहूर्त नहीं देता।

क्या पितृपक्ष में भागवत-कथा करा सकते हैं? +

नहीं। ये पन्द्रह दिन पितरों के हैं। भागवत-कथा, यज्ञ, हवन और नए जप देव-कार्य हैं, जो इस समय वर्जित हैं।

श्राद्ध में कौवे को भोजन क्यों देते हैं? +

पंचबलि में कौवा, कुत्ता, चींटी और गौ — सबका भाग है। सनातन धर्म में हर जीव का आदर है, इसलिए सबके लिए भोजन निकाला जाता है।

श्राद्ध के बाद कितने दिन नियम रखने होते हैं? +

पार्वण श्राद्ध के बाद तीन दिन श्राद्ध का भोजन नहीं किया जाता और अनध्याय रखा जाता है।