AI Summary · लेख सार
रुद्राक्ष शिव-उपासना से जुड़ा है और इसे धारण करने के कुछ नियम बताए गए हैं। नीचे यह दिया गया है — धारण से पहले शुद्धिकरण कैसे करें, प्राण-प्रतिष्ठा और धारण का मंत्र, किस मुखी का परम्परा में क्या भाव है, और धारण के बाद किन नियमों का पालन आवश्यक माना गया है।
Key Takeaways · मुख्य बिंदु
- धारण से पहले शुद्धिकरण और अभिमंत्रण का विधान है
- सोमवार या शिवरात्रि को धारण करने की परम्परा है
- लाल या पीले धागे में, या चाँदी-सोने में पिरोकर
- अशुद्धि के समय उतार देने का नियम है
- रुद्राक्ष किसी और को पहनने नहीं दिया जाता
धारण से पहले
- रुद्राक्ष को कच्चे दूध में कुछ समय रखिए, फिर गंगाजल या शुद्ध जल से धो लीजिए।
- साफ़ वस्त्र से पोंछकर शिव के सामने रखिए।
- ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए उस पर जल और बेलपत्र अर्पित कीजिए।
- धूप-दीप दिखाकर धारण-मंत्र पढ़िए, फिर धारण कीजिए।
धारण का मंत्र
- ॐ नमः शिवाय — यही सबसे सुलभ और सर्वत्र मान्य है
- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् — रुद्र गायत्री
किस दिन
सोमवार उत्तम माना जाता है। इसके अतिरिक्त शिवरात्रि, श्रावण मास का सोमवार, या किसी पर्व के दिन। प्रातःकाल स्नान के बाद धारण करने का विधान है।
किस मुखी का क्या भाव
परम्परा में जो कहा जाता है —
| मुखी | सम्बन्ध |
|---|---|
| एक मुखी | शिव · अत्यन्त दुर्लभ |
| दो मुखी | अर्धनारीश्वर |
| तीन मुखी | अग्नि |
| चार मुखी | ब्रह्मा |
| पाँच मुखी | कालाग्नि रुद्र · सबसे सुलभ, सामान्य धारण के लिए |
| छह मुखी | कार्तिकेय |
| सात मुखी | सप्तमातृका |
| आठ मुखी | गणेश |
| नौ मुखी | दुर्गा |
| ग्यारह मुखी | रुद्र |
| चौदह मुखी | हनुमान |
सामान्य धारण के लिए पाँच मुखी ही सबसे अधिक प्रचलित और सुलभ है। अधिक मुखी वाले रुद्राक्ष के नाम पर बड़ी क़ीमत माँगी जाती है — इसमें सावधानी रखिए।
धारण के नियम
- लाल या पीले धागे में पिरोइए, या चाँदी/सोने में। काले धागे का प्रयोग नहीं किया जाता।
- गले में, कलाई पर या हृदय के पास धारण किया जाता है।
- अशुद्धि के समय — जन्म या मृत्यु के सूतक में — उतार देने का नियम है।
- मांस-मदिरा के सेवन के समय रुद्राक्ष धारण नहीं रखा जाता।
- श्मशान या अशुद्ध स्थान पर जाते समय उतार देने की परम्परा है।
- किसी और को पहनने न दीजिए। धारण किया हुआ रुद्राक्ष व्यक्तिगत माना जाता है।
- सोते समय उतारकर पूजा-स्थान में रख देना उत्तम कहा गया है।
टूट जाए तो
रुद्राक्ष टूट या फट जाए तो उसे धारण नहीं किया जाता। उसे किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दीजिए या पीपल के नीचे रख दीजिए, और नया धारण कर लीजिए। इसमें कोई अशुभ बात नहीं है।
एक ज़रूरी सावधानी
रुद्राक्ष के नाम पर आजकल बहुत कुछ बेचा जाता है। ध्यान रखिए —
- कोई भी वस्तु फल का वचन नहीं देती। जो ऐसा कहकर बेचे, उससे दूरी रखिए।
- असली-नकली की जाँच के नाम पर जो तरीक़े बताए जाते हैं, वे सब भरोसे लायक़ नहीं।
- कुंडली देखे बिना कोई भी धारण-वस्तु तय करना उचित नहीं।
यह लेख शास्त्र और परम्परा की जानकारी देने के लिए है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपनी कुंडली दिखाकर परामर्श ले लेना उचित रहता है, क्योंकि एक ही उपाय हर कुंडली पर एक जैसा लागू नहीं होता।
*स्रोत — धारण-विधि और नियम पारम्परिक शिव-उपासना-पद्धति के अनुसार। मुखी-भेद परम्परा में प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है।*
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आचार्य जी से परामर्श बुक करेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
रुद्राक्ष धारण करने से पहले क्या करना चाहिए? +
उसे कच्चे दूध में कुछ समय रखकर फिर गंगाजल या शुद्ध जल से धो लीजिए। साफ़ वस्त्र से पोंछकर शिव के सामने रखिए, ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए जल और बेलपत्र अर्पित कीजिए, फिर धारण कीजिए।
रुद्राक्ष किस दिन पहनना चाहिए? +
सोमवार उत्तम माना जाता है। शिवरात्रि, श्रावण का सोमवार या किसी पर्व का दिन भी लिया जाता है। प्रातःकाल स्नान के बाद धारण करने का विधान है।
सामान्य व्यक्ति कौन-सा रुद्राक्ष पहने? +
पाँच मुखी सबसे अधिक प्रचलित और सुलभ है, जो कालाग्नि रुद्र से सम्बन्धित माना जाता है। अधिक मुखी वाले रुद्राक्ष के नाम पर बड़ी क़ीमत माँगी जाती है — उसमें सावधानी रखनी चाहिए।
रुद्राक्ष टूट जाए तो क्या करें? +
टूटा या फटा रुद्राक्ष धारण नहीं किया जाता। उसे किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दीजिए या पीपल के नीचे रख दीजिए, और नया धारण कर लीजिए। इसमें कोई अशुभ बात नहीं है।
क्या रुद्राक्ष किसी और को पहनने दे सकते हैं? +
नहीं। धारण किया हुआ रुद्राक्ष व्यक्तिगत माना जाता है और उसे किसी और को पहनने नहीं दिया जाता।
ॐ