AI Summary · लेख सार

शुक्रवार लक्ष्मी जी का दिन माना जाता है। नीचे उनकी पूजा की पूरी विधि दी गई है — सामग्री, क्रम, कमल और श्वेत पुष्प का विधान, मंत्र, शुक्रवार व्रत के नियम, तथा वे बातें जो घर में लक्ष्मी-पूजन के समय परम्परा में ध्यान रखी जाती हैं।

Key Takeaways · मुख्य बिंदु

  • शुक्रवार और पूर्णिमा लक्ष्मी-उपासना के लिए विशेष
  • कमल का पुष्प उनका सबसे प्रिय कहा गया है
  • लक्ष्मी-पूजन में गणेश-पूजन पहले होता है
  • स्वच्छता इस उपासना की पहली शर्त मानी गई है
  • दीपक की दिशा और संख्या का नियम है

सामग्री

  • लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र — साथ में गणेश जी
  • कमल का पुष्प, या श्वेत/गुलाबी पुष्प
  • अक्षत, हल्दी, कुमकुम, चन्दन
  • कमलगट्टा, पान, सुपारी, नारियल
  • खीर, बताशे, मिश्री, पंचामृत
  • घी का दीपक, धूप, कपूर
  • लाल या गुलाबी वस्त्र, श्रृंगार की वस्तुएँ

विधि — क्रम से

  1. घर, विशेषकर पूजा-स्थान, स्वच्छ कीजिए। लक्ष्मी-उपासना में यह पहली शर्त मानी गई है।
  2. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनिए।
  3. चौकी पर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाकर प्रतिमा स्थापित कीजिए — गणेश जी बाईं ओर।
  4. घी का दीपक जलाइए और संकल्प लीजिए।
  5. पहले गणेश-पूजन, फिर लक्ष्मी-पूजन। क्रम उलटा नहीं होता।
  6. जल से आचमन, फिर पंचामृत से स्नान, फिर शुद्ध जल।
  7. वस्त्र, हल्दी-कुमकुम, चन्दन और श्रृंगार अर्पित कीजिए।
  8. कमल या श्वेत पुष्प चढ़ाइए। कमलगट्टा अर्पित कीजिए।
  9. धूप-दीप दिखाइए, खीर और बताशे का भोग लगाइए।
  10. मंत्र-जप, फिर आरती। अंत में प्रसाद बाँटिए।

मंत्र

  • ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
  • ॐ महालक्ष्म्यै नमः
  • ॐ श्रीं नमः

शुक्रवार व्रत

  • प्रातः स्नान करके संकल्प लीजिए।
  • दिन में एक समय भोजन, या फलाहार। खट्टी वस्तुओं से परहेज़ की परम्परा है।
  • सायंकाल पूजन और कथा।
  • व्रत की संख्या पहले तय कर लीजिए — 11, 16 या 21। और उसे निभाइए।

ध्यान की बातें

  • स्वच्छता — यह इस उपासना की सबसे बड़ी बात है। परम्परा में कहा जाता है कि अस्वच्छ स्थान पर लक्ष्मी नहीं ठहरतीं।
  • दीपक — पूजा-स्थान के दाहिनी ओर घी का दीपक; बाईं ओर तेल का, यदि रखना हो।
  • टूटी प्रतिमा — घर की पूजा में टूटी या खंडित प्रतिमा नहीं रखी जाती।
  • लक्ष्मी और गणेश साथ — यही परम्परा है, और गणेश जी बाईं ओर रहते हैं।
  • खड़ी लक्ष्मी बनाम बैठी लक्ष्मी — घर की नित्य पूजा के लिए कमल पर विराजमान (बैठी) प्रतिमा उपयुक्त मानी जाती है।

एक बात साफ़ कह देनी चाहिए

लक्ष्मी-उपासना के नाम पर जो "रातों-रात धन" वाली बातें कही जाती हैं, वे शास्त्र में कहीं नहीं हैं। शास्त्र में लक्ष्मी को श्री कहा गया है — जो केवल धन नहीं, शोभा, मर्यादा और सुव्यवस्था है। उपासना का उद्देश्य वही है।

यह लेख शास्त्र और परम्परा की जानकारी देने के लिए है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपनी कुंडली दिखाकर परामर्श ले लेना उचित रहता है, क्योंकि एक ही उपाय हर कुंडली पर एक जैसा लागू नहीं होता।

*स्रोत — पूजा-क्रम और व्रत-विधान पारम्परिक कर्मकाण्ड-पद्धति के अनुसार। व्रत या पर्व की तिथि अपने पंचांग से मिलाकर तय कीजिए।*

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

लक्ष्मी पूजा में गणेश जी क्यों रखे जाते हैं? +

परम्परा में किसी भी शुभ कार्य के आरम्भ में गणेश-पूजन का विधान है, इसलिए लक्ष्मी-पूजन से पहले गणेश-पूजन किया जाता है। प्रतिमा में गणेश जी लक्ष्मी जी के बाईं ओर रखे जाते हैं।

लक्ष्मी जी को कौन-सा पुष्प प्रिय है? +

कमल सबसे प्रिय कहा गया है। कमल उपलब्ध न हो तो श्वेत या गुलाबी पुष्प अर्पित किए जाते हैं। कमलगट्टा भी अर्पित करने की परम्परा है।

शुक्रवार व्रत कैसे करें? +

प्रातः स्नान करके संकल्प लीजिए, दिन में एक समय भोजन या फलाहार करें, और सायंकाल पूजन तथा कथा। व्रतों की संख्या — 11, 16 या 21 — पहले तय कर लेनी चाहिए और उसे निभाना चाहिए।

क्या लक्ष्मी पूजा से रातों-रात धन मिलता है? +

शास्त्र में ऐसी कोई बात नहीं है। लक्ष्मी को श्री कहा गया है, जिसका अर्थ केवल धन नहीं — शोभा, मर्यादा और सुव्यवस्था भी है। उपासना का उद्देश्य वही है।