AI Summary · लेख सार
हनुमान जी की उपासना मंगलवार और शनिवार — दोनों दिन की जाती है। मंगलवार उनका अपना दिन है; शनिवार को उनकी उपासना शनि से सम्बन्धित कष्ट में की जाती है। नीचे पूजा की सामग्री, क्रम, सिंदूर और चमेली के तेल का विधान, ध्यान-श्लोक, मंत्र, प्रसाद और नियम दिए गए हैं।
Key Takeaways · मुख्य बिंदु
- मंगलवार उनका दिन है; शनिवार को शनि-सम्बन्धी कष्ट में उपासना होती है
- सिंदूर चमेली के तेल में मिलाकर चढ़ाने की परम्परा है
- ध्यान-श्लोक "मनोजवं मारुततुल्यवेगं" रामायण-परम्परा का है
- प्रसाद में बूँदी, गुड़-चना और केला प्रचलित हैं
- ब्रह्मचर्य और शुद्धि का पालन इस उपासना में विशेष कहा गया है
पूजा की सामग्री
- सिंदूर और चमेली का तेल
- लाल वस्त्र या लाल लंगोट
- जल, अक्षत (साबुत चावल), पुष्प — विशेषतः लाल पुष्प
- धूप, दीप (तिल या चमेली के तेल का)
- पान का बीड़ा
- प्रसाद — बूँदी, गुड़-चना, केला, या बेसन के लड्डू
विधि — क्रम से
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनिए। लाल या पीला वस्त्र उत्तम माना जाता है।
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठिए।
- हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाइए।
- जल से आचमन और स्नान कराइए। धातु की मूर्ति हो तो जल से, चित्र हो तो केवल भाव से।
- सिंदूर चमेली के तेल में मिलाकर अर्पित कीजिए। यह इस उपासना का विशेष अंग है।
- लाल वस्त्र, पुष्प और अक्षत चढ़ाइए।
- धूप-दीप दिखाकर नीचे दिया ध्यान-श्लोक और मंत्र पढ़िए।
- प्रसाद अर्पित कीजिए, फिर आरती।
- अंत में प्रसाद बाँटिए — स्वयं अकेले न खाइए।
ध्यान-श्लोक
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
अर्थ — जो मन के समान वेगवाले हैं, वायु के समान गति वाले हैं, जितेन्द्रिय हैं, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, वायु के पुत्र हैं, वानरों के नायक हैं और श्रीराम के दूत हैं — उनकी मैं शरण लेता हूँ।
मंत्र
- ॐ हं हनुमते नमः
- ॐ हनुमते नमः
- राम-नाम का जप — हनुमान जी की उपासना में यह सबसे प्रिय कहा गया है
शनिवार की उपासना
शनि से सम्बन्धित कष्ट में हनुमान जी की शरण लेने की परम्परा बहुत पुरानी है। शनिवार को —
- तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है
- चोला चढ़ाने की परम्परा है
- उड़द से बनी वस्तु का प्रसाद भी कहीं-कहीं चढ़ता है
कुछ उपाय जो शास्त्र-सम्मत हैं
- पाठ का नियम — नित्य एक निश्चित पाठ, नियत समय पर। नियम टूटने न दीजिए।
- पीपल के नीचे दीपक — शनिवार सायंकाल।
- सेवा — बंदरों को चना-गुड़, पक्षियों को दाना। यह सबसे सरल और सबसे कम बोला जाने वाला उपाय है।
- मौन — उपासना के समय बात न कीजिए। यह छोटी बात है पर इसी से भाव टिकता है।
नियम और ध्यान की बातें
- इस उपासना में शुद्धि और संयम का विशेष विधान है।
- मांस-मदिरा से दूर रहना आवश्यक कहा गया है।
- सिंदूर बाएँ से दाएँ की ओर चढ़ाया जाता है।
- स्त्रियों के लिए चोला चढ़ाने को लेकर अलग-अलग परम्पराएँ हैं; अपने कुल की रीति का पालन कीजिए।
- कोई भी नियम आरम्भ करने से पहले सोच लीजिए कि आप उसे निभा पाएँगे — आरम्भ करके छोड़ देना ठीक नहीं माना जाता।
यह लेख शास्त्र और परम्परा की जानकारी देने के लिए है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपनी कुंडली दिखाकर परामर्श ले लेना उचित रहता है, क्योंकि एक ही उपाय हर कुंडली पर एक जैसा लागू नहीं होता।
*स्रोत — ध्यान-श्लोक रामायण-परम्परा से; पूजा-क्रम और सामग्री पारम्परिक कर्मकाण्ड-पद्धति के अनुसार। व्रत या अनुष्ठान की तिथि अपने पंचांग से मिलाकर तय कीजिए।*
व्यक्तिगत मार्गदर्शन चाहते हैं? अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाएँ।
आचार्य जी से परामर्श बुक करेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हनुमान जी की पूजा किस दिन करें? +
मंगलवार उनका अपना दिन है। शनिवार को उनकी उपासना शनि से सम्बन्धित कष्ट में की जाती है। नित्य पूजा किसी भी दिन की जा सकती है।
हनुमान जी को सिंदूर कैसे चढ़ाते हैं? +
सिंदूर को चमेली के तेल में मिलाकर अर्पित किया जाता है। यह इस उपासना का विशेष अंग माना गया है।
हनुमान जी को क्या प्रसाद चढ़ाएँ? +
बूँदी, गुड़-चना, केला और बेसन के लड्डू प्रचलित हैं। प्रसाद अर्पित करने के बाद बाँट देना चाहिए, अकेले नहीं खाना चाहिए।
क्या शनि की दशा में हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए? +
शनि से सम्बन्धित कष्ट में हनुमान जी की शरण लेने की परम्परा बहुत पुरानी है और व्यापक रूप से मानी जाती है। पर उपाय कुंडली देखकर ही तय करना उचित रहता है।
ॐ