AI Summary · लेख सार

गुरुवार बृहस्पति का दिन है। कुंडली में बृहस्पति को ज्ञान, विवेक, सन्तान और विवाह का कारक कहा गया है। नीचे गुरुवार व्रत की पूरी विधि, केले के वृक्ष के पूजन का क्रम, बृहस्पति का ध्यान-श्लोक, बीज मंत्र, जप-संख्या और दान की वस्तुएँ दी गई हैं।

Key Takeaways · मुख्य बिंदु

  • पीली वस्तुओं का इस व्रत में विशेष स्थान है
  • केले के वृक्ष का पूजन प्रचलित परम्परा है
  • बृहस्पति का जप 19,000 बताया गया है
  • गुरुवार को बाल-नख काटने और कपड़े धोने का निषेध कहा जाता है
  • व्रत की संख्या 16 प्रचलित है

सामग्री

  • पीले वस्त्र, पीले पुष्प, पीली मिठाई
  • चने की दाल, हल्दी, गुड़
  • केले का वृक्ष (जहाँ सम्भव हो) — या उसका चित्र
  • घी का दीपक, धूप, अक्षत, कुमकुम

विधि — क्रम से

  1. प्रातः स्नान करके पीला वस्त्र पहनिए।
  2. संकल्प लीजिए — कितने गुरुवार व्रत रखेंगे। सोलह की संख्या प्रचलित है।
  3. भगवान विष्णु या बृहस्पति देव की पूजा कीजिए — पीले पुष्प, हल्दी और चने की दाल अर्पित करके।
  4. केले के वृक्ष की जड़ में जल दीजिए, हल्दी लगाइए, और दीपक जलाइए। जहाँ वृक्ष न हो, वहाँ विष्णु-पूजन पर्याप्त है।
  5. ध्यान-श्लोक और मंत्र का जप कीजिए।
  6. पीली मिठाई या गुड़-चने का भोग लगाइए।
  7. व्रत-कथा सुनिए या पढ़िए।
  8. दिन में एक समय भोजन — वह भी पीली वस्तुओं का।

ध्यान-श्लोक

देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम् ।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् ॥

अर्थ — देवताओं और ऋषियों के गुरु, स्वर्ण के समान कांतिवाले, बुद्धि-स्वरूप और तीनों लोकों के स्वामी बृहस्पति को मैं नमस्कार करता हूँ।

मंत्र और जप

  • बीज मंत्र — ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
  • सामान्य मंत्र — ॐ बृं बृहस्पतये नमः
  • जप-संख्या — 19,000; पूर्ण होने पर दशांश हवन

दान

गुरुवार को — चने की दाल, हल्दी, पीला वस्त्र, गुड़, और सामर्थ्य हो तो पुखराज।

दान वहाँ जाए जहाँ उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। विद्यार्थियों को पुस्तक या शिक्षा में सहयोग भी बृहस्पति का दान माना जाता है — और यह सबसे उपयुक्त है, क्योंकि बृहस्पति ज्ञान के कारक हैं।

जो नहीं किया जाता

परम्परा में गुरुवार को इनका निषेध कहा जाता है —

  • बाल और नख काटना
  • कपड़े धोना
  • घर में झाड़ू से कूड़ा बाहर निकालना

ये कुल और क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं। अपने घर की रीति का पालन कीजिए।

व्रत के नियम

  • संख्या पहले तय कीजिए — सोलह प्रचलित है।
  • अंतिम व्रत पर उद्यापन का विधान है।
  • व्रत बीच में छोड़ा नहीं जाता। स्वास्थ्य के कारण छूट जाए तो आगे बढ़ाकर पूरा कीजिए।
  • स्त्रियों के लिए मासिक धर्म के दिनों में व्रत स्थगित रखकर बाद में पूरा करने की परम्परा है।
यह लेख शास्त्र और परम्परा की जानकारी देने के लिए है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपनी कुंडली दिखाकर परामर्श ले लेना उचित रहता है, क्योंकि एक ही उपाय हर कुंडली पर एक जैसा लागू नहीं होता।

*स्रोत — ग्रह-ध्यान के श्लोक व्यास-कृत नवग्रह स्तोत्र से; विधि और दान-क्रम पारम्परिक कर्मकाण्ड-पद्धति के अनुसार। किसी भी अनुष्ठान की तिथि और मुहूर्त अपने पंचांग से मिलाकर ही निश्चित कीजिए।*

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गुरुवार व्रत कितने रखने चाहिए? +

सोलह की संख्या सबसे प्रचलित है। संकल्प लेते समय संख्या तय कर लेनी चाहिए और अंतिम व्रत पर उद्यापन का विधान है।

गुरुवार को क्या दान करें? +

चने की दाल, हल्दी, पीला वस्त्र और गुड़। विद्यार्थियों को पुस्तक या शिक्षा में सहयोग भी बृहस्पति का दान माना जाता है, और यह सबसे उपयुक्त है क्योंकि बृहस्पति ज्ञान के कारक हैं।

क्या गुरुवार को बाल कटवा सकते हैं? +

परम्परा में गुरुवार को बाल और नख काटने, कपड़े धोने तथा झाड़ू से कूड़ा बाहर निकालने का निषेध कहा जाता है। यह कुल और क्षेत्र के अनुसार बदलता है — अपने घर की रीति का पालन कीजिए।

बृहस्पति का मंत्र कितनी बार जपें? +

शास्त्र में बृहस्पति के लिए 19,000 जप बताया गया है। पूर्ण होने पर दशांश हवन, तर्पण, मार्जन और ब्राह्मण-भोजन का विधान है।