बिना पाप किए भी पाप कैसे लगता है? — कर्ण का प्रसंग और गौ-ग्रास का मन्त्र

AI Summary · लेख सार

स्वयं पाप न करने पर भी दोष लग सकता है — यदि हम स्नेह, लोभ, भय या अज्ञान से किसी पापी का साथ दें या उसका समर्थन करें। "संसर्गजा दोषगुणा भवन्ति" — संगति से गुण भी आते हैं, दोष भी। कर्ण जैसे महादानी की दुर्दशा का कारण यही था कि उन्होंने अधर्म का साथ दिया। इसका उपाय शास्त्र में गौ-सेवा बताया गया है — विशेषकर मन्त्र सहित गौ को ग्रास देना।

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Key Takeaways · मुख्य बिंदु

  • स्नेह, लोभ, भय या अज्ञान से पापी का साथ देना भी दोष लाता है
  • संगति से गुण भी आते हैं, दोष भी
  • कर्ण की दुर्दशा का कारण था अधर्म का साथ
  • गौ-स्पर्श और गौ-सेवा इस सम्बन्ध को काटती है
  • मन्त्र सहित दिया गया ग्रास साधारण ग्रास से कहीं अधिक फल देता है

प्रश्न

क्या बिना पाप किए भी पाप लग सकता है?

डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा कहते हैं — हाँ, और इसमें कोई सन्देह नहीं।

कोई व्यक्ति गौ-हत्या, ब्रह्म-हत्या करता है, दिन-रात मद्य-मांस में लगा है। यदि आप स्नेह से, लोभ से, भय से या अज्ञान से उसका साथ देते हैं, उस पर अनुग्रह करते हैं, उसका समर्थन करते हैं — तो उसका जो पाप है, उसका सम्बन्ध आपसे जुड़ जाता है। उसे जो फल मिलेगा, उसका अंश आपको भी मिलने लगता है।

संसर्गजा दोषगुणा भवन्ति ।

अर्थ — संगति से ही गुण और दोष आते हैं।

कर्ण का प्रश्न

महाभारत में अन्तिम समय कर्ण ने श्रीकृष्ण से पूछा —

"हे मधुसूदन, आप ही कहते हैं कि मुझ जैसा दानी कोई नहीं, मुझ जैसा धनुर्धर कोई नहीं, मैं परशुराम का शिष्य हूँ। फिर जब मेरे जीतने का समय आया, तो मेरे रथ का पहिया धरती में धँस गया। मैंने जीवन में पाप नहीं किया, फिर मेरी मृत्यु ऐसी दुर्दशा में क्यों?"

श्रीकृष्ण ने कहा — "तुम्हारे जैसा दानवीर संसार में नहीं था, यह सत्य है। अन्तर इतना है कि जो पापी और अपराधी थे, तुमने उनका साथ दिया। उनके पाप तुमसे जुड़ते चले गए।"

अर्जुन ने धर्म का साथ दिया, कर्ण ने अधर्म का। कोई कितना ही पुण्यात्मा क्यों न हो, अधर्म का साथ देगा तो अधर्मी के पाप का फल उसे भी मिलेगा। भीष्म और द्रोण के उदाहरण भी यही बताते हैं।

आज के समय में क्या करें

आज दफ़्तर में, कारोबार में, हर जगह हर तरह के लोग मिलते हैं। न चाहते हुए भी सम्बन्ध बन जाता है। तो इस दोष से कैसे बचें?

डॉ. शर्मा बिजली का उदाहरण देते हैं — तार में बीच से कट लगा दो, तो बिजली आगे नहीं जाती। वैसे ही गौ का स्पर्श बीच का कट है। गौ बीच में आ गई, तो पापी का पाप पापी तक ही लौट जाता है, आप तक नहीं आता।

गौ-सेवा और ब्राह्मण-सेवा निष्फल नहीं जाती। समय लग सकता है, पर फल मिलता ही है।

मन्त्र सहित ग्रास

साधारण ढंग से चारा डाल देने का भी फल है। पर मन्त्र सहित दिया गया ग्रास उससे कहीं अधिक फल देता है — जैसे साधारण पूजा और समन्त्रक पूजा में अन्तर है।

गौ को ग्रास देते समय यह भाव रखिए —

गावो मे मातरः सर्वाः पितरश्चैव गोवृषाः ।
ग्रासमुष्टिर्मया दत्ता प्रतिगृह्णन्तु मातरः ॥

अर्थ — सब गौएँ मेरी माताएँ हैं और वृषभ (नन्दीश्वर) मेरे पिता। मैंने यह मुट्ठी-भर ग्रास दिया है — हे माता, इसे ग्रहण कीजिए।

जिनका समय पर यज्ञोपवीत हुआ है, वे गायत्री मन्त्र से अभिमन्त्रित करके भी ग्रास दे सकते हैं।

शास्त्र कहता है कि इस विधि से जाने-अनजाने किए गए दोष नष्ट होते हैं, और बुरे स्वप्न भी शान्त होते हैं। डॉ. शर्मा कहते हैं — बस तरीक़ा बदलना है, और मन्त्र आना चाहिए।

*स्रोत — यह लेख डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा की वीडियो-चर्चा पर आधारित है (ऊपर वीडियो की कड़ी)। मन्त्र का पाठ वीडियो की वाणी से लिया गया है — उच्चारण गुरु या कुल-पुरोहित से मिला लीजिए।*

यह पूरी बात डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा से सुनिएवीडियो में 58:37 से · YouTube पर

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या बिना पाप किए भी पाप लग सकता है? +

हाँ। डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा के अनुसार यदि कोई स्नेह, लोभ, भय या अज्ञान से किसी पापी का साथ देता है या उसका समर्थन करता है, तो उसके पाप का सम्बन्ध उससे जुड़ जाता है।

कर्ण की दुर्दशा का कारण क्या था? +

श्रीकृष्ण ने कर्ण से कहा कि तुम जैसा दानवीर कोई नहीं था, पर तुमने अधर्मियों का साथ दिया — इसलिए उनके पाप तुमसे जुड़ते चले गए।

संगति के दोष से कैसे बचें? +

गौ-सेवा से। डॉ. शर्मा के अनुसार गौ का स्पर्श बिजली के तार में कट की तरह है — पापी का पाप पापी तक लौट जाता है।

गौ को ग्रास देने का मन्त्र क्या है? +

"गावो मे मातरः सर्वाः पितरश्चैव गोवृषाः। ग्रासमुष्टिर्मया दत्ता प्रतिगृह्णन्तु मातरः॥" — सब गौएँ मेरी माताएँ और वृषभ मेरे पिता हैं; यह ग्रास ग्रहण कीजिए।